अवनि लेखरा गोल्ड मेडलिस्ट – निशानेबाज़ी में गोल्ड जीत रचा इतिहास, 12 साल की उम्र में हुआ पैरालिसिस

अवनि लेखरा गोल्ड मेडलिस्ट:- नमस्ते! मित्रो आज मैं आपके पास फिर से एक नई खबर के साथ आयी हूँ। आज हम बात करेंगे अवनि लेखरा के बारे में जैसा की आप सभी को यदि नहीं पता हो तो मैं आपको बताना चाहूँगी की आज अवनि लेखरा ने निशानेबाजी में स्वर्ण पदक हासिल किया है। इन्होने स्वर्ण पदक जीतकर न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया बल्कि पुरे भारत देश का नाम आगे किया है।

अवनि लेखरा गोल्ड मेडलिस्ट

और इतिहास भी रचा है महिलाओं की 10 METER एयर स्पर्धा SH-1 में यह GOLD MEDAL जीता। Tokyo Paralympics में भारत का यह पहला GOLD MEDAL है। अवनि लेखरा जी ने बहुत संघर्ष करके ये मुकाम हासिल किया है। यंहा तक पहुंचने में उन्होने बहुत जयदा महान की है आईये हमारे इस लेख के द्वारा इनके जूनून इनके सपने को पूरा करने तक की कहनी पढ़े। इनके बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारे इस लेख को पूरा पढ़े।

संघर्ष की शुरुआत

अवनि लेखरा जी 2012 में 12 साल की आयु में किसी एक्सीडेंट के कारन परैलिसिस की शिकार हो गयी। और उन्हें व्हीलचेयर पर बैठना पड़ा। परन्तु अवनिजि निहार नहीं मानी वह निरन्तर प्रयास करती रही आगे पड़ने के लिए उन्होंने दुर्घटना के 3 साल बाद ही निशानेबाज़ी को अपना सपना बना लिया। और मात्र 5 सालो में उन्होंने अपना यह सपना पूरा किया और स्वर्ण पदक हासिल किया ।

दुर्घटना के बाद  हो गई थीं बेहद कमजोर

अवनि जी के पिता प्रवीण बताते हैं कि दुर्घटना के पश्चात काफी कजोर हो गयी और उनका हौसला टूट गया गुमशुम रहने लग गई थी। किसी से बात नहीं करती थी, पूरी तरह से चिंता में दुब गयी थी। उन्होंने कहा कि इनके साथ हुई दुर्घटना के कारण इसकी पीठ पूरी तरह काटनी पड़ी। इतनी कमजोर हो गई थी कि कुछ कर नहीं पाती थी। यहां तक की कोई हल्का सामान भी उठाना मुश्किल हो रहा था। अवनि के माता-पिता ने सोचा की अवनि का ध्यान किसी खेल में लगाया जाए।

अवनि लेखरा गोल्ड मेडलिस्ट (1) (1)

उन्होने बहुत सोच-विचार करके अवनि जी को निशानेबाज़ी करने को कहा। उस समय अवनि के पिता चिंता में थे। क्योकि निशानेबाज़ी करते समय अवनि जी से बन्दुक भी नहीं उठती थी। पर उन्हें यह नहीं प् था की आज उनकी बेटी की वजह से टोक्यो पैरालिम्पिक के पोडियम पर राष्ट्रगान गूंजेगा। अवनि पढ़ने – लिखने में भी काफी होशियार थी और वह अन्य एक्टिविटि में भी आगे थी अवनि जी ने अपनी कमजोरी को अपने सपनो पर हावी नहीं पड़ने दिया

अवनि जी के पिता ने उनका बहुत साथ दिया उन्होंने उनका मन बहलाने के लिए उन्हें Shooting Range घुमाने लेकर गए अवनि लेखरा जी को वंही से निशानेबाज़ी की रूचि जगी। अवनि जी तब तक अभ्यास करती रहती थी जब तक की वह पूरी तरह से तक नहीं जाती थी।

कोरोना काल रहा मुश्किल भरा

COVID 19 के चलते अवनि को पिछले 2 सालों से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसके चलते उनके अभ्यास पर बहुत असर पड़ा। लेकिन उनके पिता ने घर में टारगेट सेट कर अवनी जी के अभ्यास में किसी भी नहीं छोड़ी। Paralympics की तैयारी कर रही अवनि जी घर पर ही टारगेट पर अभ्यास कर रही थीं साथ ही उस समय उनका GOLD पर निशाना साधना ही लक्ष्य था। इसके लिए वो नियमित रूप से जिम और योगा पर ध्यान दे रही थीं।

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अवनि लेकरा ने फ़ाइनल में 249.6 के कुल स्कोर के साथ विश्व रिकॉर्ड की बर्बरी करते होते GOLD MEDAL जीता। Tokyo Paralympics खेलो में यह भारत का अब तक का चौथा पदक है। 19 वर्षीय, पैरालिंपिक में GOLD MEDAL जितने वाली पहली भारतीय महिला बनाने का भी इतिहास रचा । कुल मिलाकर वह तैराक मुरलीकांत , पेटकर (1972), भाला फेकने वाला देवेंद्र झांझरिया (2004 और 2016) और हाई जम्पर थंगावेलु मरियप्पन (2016) के पश्चात् Paralympics GOLD MEDAL वाली चौथी भारतीय एथलीट है।

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समाचार एजेंसी PTI ने लेखरा के हवाले से कहा, “मैं इस भावना का वर्णन नहीं कर सकता, मुझे ऐसा लगा रहा है की मैं दुनिया के शीर्ष पर हूँ। यह अस्पष्ट है। ” उन्होंने कहा , “मैं बहुत खुश हूँ की मैं इसमें योगदान देने वाली हो सकती हूँ। उम्मीद है कि अभी और भी कई पदक आने बाकी हैं।” लेखरा ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि मैं इसमें योगदान देने वाला बन पाया। उम्मीद है कि अभी और भी कई पदक आने बाकी हैं।” “मैं बस एक ही बात कह रहा था, कि मुझे एक बार में एक शॉट लेना है। अब और कोई बात नहीं है, बस एक बार में एक शॉट लें और बस इसे खत्म करें।

यह सब कुछ आज आपने इस लेख के जरिये जाना है। उम्मीद है यह लेख आपके लिए लाभदायक रहा होगा। अगर आपको इस लेख में कुछ समझ नहीं आया हो तो आप कमेंट करके पूछ सकते है। हमारे इस लेख को अपने दोस्तों,रिश्तेदारों,इत्यादि तक शेयर करना न भूले। मैं PRADEEP SINGH आपका तहे दिल से शुक्रिया करता हूँ| कि आपने हमारे लेख को पूरा पढ़ा । और आपने अपना कीमती समय इसे पढ़ने में लगाया। एक बार फिर से दिल से धन्यावद !